मानव अपने विवेक से समझता है “सौंदर्य”

                               युवा चित्रकार संदीप कुमार  मेघवाल से भूपेन्द्र कुमार अस्थाना की बातचीत नई दिल्ली स्थित ललित कला अकादमी  के कला वीथिका संख्या एक मे उदयपुर राजस्थान के युवा चित्रकार संदीप कुमार मेघवाल की चित्रोंं की प्रदर्शनी लगाई गई जिनमे छापा कला और पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया ।       मेघवाल कहते हैं कि  कला पर आत्मिक चिंतन करूं तो मैं किसी वस्तु को देखता हूँ तो उस वस्तु के रूप विश्लेषण से मन पर जो प्रभाव पड़ते है उनमें एक प्रभाव सुंदरता का भी है जिसके आधार पर वस्तु में…

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भैरव से भैरवी तक की यात्रा

0 पूजा श्रीवास्तव सप्त सुरन, तीन ग्राम, उड़नचास कोटितान,    गुणीजन सब करत गान, नाद ब्रह्म जागे। सुर सम्राट तानसेन की इस उक्ति का अर्थ है कि गुणीजनों द्वारा सात सुरों ,तीन ग्राम और तानों के उन्चास प्रकार के स्वरबद्ध गान से नाद ब्रह्म की उत्पत्ति होती है। ऐसा माना जाता है भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल स्वरों का आरोह अवरोह नहीं बल्कि ध्यान की ,अध्यात्म की एक प्रक्रिया है। जन्म तो हम सब एक जीव के रुप में लेते हैं लेकिन हमें मनुष्य बनाते है हमारे संस्कार और हमारा समाजीकरण।…

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कई नए रंगों के साथ होगा जयपुर आर्ट समिट

संस्थापक और निदेशक शैलेन्द्र भट्ट से रंग राग के भूपेंद्र कुमार अस्थाना की बातचीत 4 से 18 दिसम्बर 2017 तक होगा महोत्सव कलाकारों और कलाप्रेमियों को जयपुर आर्ट समिट का बेसब्री से इंतजार होता है।2013 मे जयपुर आर्ट समिट शुरू हुआ जिसके अब 5वें आयोजन की तैयारी चल रही है । इसे इस बार 14 से 18 दिसम्बर 2017 से रवीद्र मंच, जयपुर मे किया जा रहा है । जयपुर आर्ट समिट ने कला जगत के कला के बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में सार्थक हस्तक्षेप किया है। जयपुर आर्ट समिट…

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पेंट‌िंग भी एक तरह का खुमार है

रंग के घर में परंपराओं के संगम से खिलते हैं फूल वरिष्ठ चित्रकार अर्पणा कौर से देव प्रकाश चौधरी की लंबी बातचीत मशहूर कथाकार ओ हेनरी की कहानी ‘द लास्ट लीफ’ की नायिका जान्सी बुखार से तपते हुए बिस्तर पर लेटे-लेटे खिड़की से सदाबहार की उस बेल को निहारती रहती थी, जिसके पत्ते बड़ी तेजी से गिर रहे थे। वह खुद से बुदबुदाती रहती थी-“जिस वक्त इस बेल की आखिरी पत्ती गिरेगी, मैं भी चली जाऊंगी। ” जान्सी उन पत्तों के साथ अपनी जिंदगी को जोड़कर सोचती थी कि जिस…

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तो मैं हिंदी को छोड़ दूंगा और अंग्रेजी में फिर चला जाऊंगा-राज बिसारिया

तो मैं हिंदी को छोड़ दूंगा और अंग्रेजी में फिर चला जाऊंगा राज बिसारिया से बातचीत 0 आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो कैसे लगता है? जिन ख्वाबों को लेकर चले थे, क्या वे पूरे हो गए? -ख्वाब तो वह होता है जो पूरा नहीं होता है। कुछ बातें जरूर किसी कारण से मन में ठानी थी। जब विश्वविद्यालय में पढ़ता था 1953 की बात है। उस समय नाटकों के कितने निर्देशक थे जो बताते थे कि ये करो, ये न करो। उस जमाने के लड़के-लड़कियां जो काम कर…

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महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों को मीडिया नोटिस

प्रसिद्ध चित्रकार  जयकृष्ण अग्रवाल से बातचीत अग्रणी छापा चित्रकारों में शुमार किए जाने वाले जयकृष्ण अग्रवाल लखनऊ स्थित कला एवं शिल्प महाविद्यालय से सन् 2001 में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं लेकिन उनकी कला यात्रा में ठहराव नहीं आया है बल्कि वे ऊर्जा से लबरेज हैं और प्रयोगों का क्रम भी जारी है। स्टेन्सिल से होते हुए कुछ समय पूर्व गिस्ली प्रिण्ट्स तक पहुंचकर उनकी कला ने एक नया बदलाव ग्रहण किया है और इससे उनकी सृजनात्मकता को भी विस्तार मिला है। 75 वर्षीय अग्रवाल की कला साधना का अपना…

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