इस रंगमंच पर भी तुम अनूठे हो पापा!

ग्रूशा कपूर सिंह प्रसिद्ध रंगकर्मी रंजीत कपूर को हिन्दी रंगमंच का राजकपूर कहा जाता रहा है। उनके प्रशंसकों का दायरा कई पीढ़ियों तक फैला है। अगर ऐसा न होता तो उनसे उनके 1977 के नाटक ‘बेगम का तकिया’ को तीन दशकों से अधिक समय बाद पुनर्जीवित करने का अनुरोध आखिर क्यों होता है? रंगमंच का उनका अपना मुहावरा है लेकिन कम ही लोग जाते हैं कि उनका जीवन कितना संघर्षों भरा, उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरा है। ये संघर्ष उनके पेशे के भी रहे हैं और पारिवारिक भी। उन्हें आज…

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धारा के विरुद्ध चलने वाला नाटककार

सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘अलग दुनिया ‘ व भारतेंदु नाट्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान मे दिनांक 19 मार्च 2017 को भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ के बी ऍम शाह प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में वरिष्ठ नाट्य लेखक राजेश कुमार को दूसरा जुगल किशोर स्मृति पुरस्कार दिया गया । समारोह की अध्यक्षता कर रहे भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक राज बिसरिया ने कहा कि रंगमंच विचार से बनता है, यह वेशभूषा की नुमाइश नहीं है। चाहे आप रंगमंच के किसी भी रूप में काम कर रहे हो, लेकिन रंगमंच का विचारात्मक होना जरूरी…

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