संगीत में नई चुनौतियों का दौर

वाराणसी में हुआ वेबीनार कोरोना काल संगीत जगत के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आया है। इस दौर में जहां संगीत के माध्यम से जीविकोपार्जन करने वाले कलाकारों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है वहीं संगीत शिक्षा के लिए भी नई परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं। संगीत शिक्षा का ऑनलाइन माध्यम को तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर ही लिया जाना चाहिए। वाराणसी के कमच्छा स्थित वसन्त कन्या पी.जी. कालेज, कमच्छा, वाराणसी के वाद्य संगीत (सितार) विभाग द्वारा 26 जून से द्विदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया जिसका…

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किस कोने लगेंगे अब ये कोने!

आलोक पराड़कर (अमर उजाला, 28 जून 2020)… पप्पू की दुकान इन्हीं कलाकारों, चित्रकारों, पत्रकारों, नेताओं और नागरिकों की दैनिक (अर्थात् दिन की) छावनी है !…हाल यह है कि दो लम्बी मेजों और चार लम्बे बेंचोंवाले इस दड़बे में दस-बारह गाहकों के बजाय बीस-पच्चीस संस्कृतिकर्मी सुबह से शाम तक ठंसे रहते हैं! उधर गोलियों के डब्बे के साथ बलदेव, इधर चूल्हे और केतली के पास पप्पू-नाम पप्पू उम्र चालीस साल!…अक्तूबर के दिन। सुबह के नौ बज रहे थे। दुकान ग्राहकों से भरी थी। कुछ लोग खाली होने के इन्तजार में गिलास लिए खड़े थे। शोर-शराबा काफी…

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मेरे सांगीतिक जीवन के आधार स्तम्भ मेरे पिता

कमला शंकर(प्रसिद्ध गिटार वादिका) सिर से पिता की छांव चली गई। 85 वर्ष की अवस्था में पिताजी 12 जून को अंतिम यात्रा को प्रस्थान कर गए। वे मेरे सांगीतिक जीवन के आधार स्तम्भ,मेरी हर सोच हर कार्य मे अविचल चट्टान की भांति खड़े रहते थे। आज मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के आशीर्वाद फलस्वरूप हूं।  पिता जी और माता जी  की पारिवारिक पृष्ठभूमि में संगीत से जुड़ाव रहा है और इसी के चलते पिता जी हारमोनियम,,बांसुरी के साथ साथ नाक से शहनाई भी बजाते थे और अपने लोगों के…

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सराही गई आनलाइन कला प्रदर्शनी

एक्सपोजिशन वर्चुअल को चार हजार कलाप्रेमियों ने देखा कोरोना संकट में सामूहिक सहभागिता के नए विकल्प तलाश रहे कलाजगत को पिछले दिनों आयोजित एक्सपोजिशन वर्चुअल आनलाइन कला प्रदर्शनी के जरिए काफी सराहना मिली है। अवध आर्ट फेस्टिवल ने इसका आयोजन खानम आर्ट्स, बंगाल आर्ट फाउंडेशन, जयपुर आर्ट समिट, लायंस क्लब, अवध जिमखाना क्लब के सहयोग और समन्वय से किया था जिसमें 50 कलाकारों और छायाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई। एक जून से दस दिनों तक चली इस प्रदर्शनी को चार हजार से अधिक कलाप्रेमियों ने देखा और सराहा। निर्णायक…

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कला की कसौटियों पर राजा रवि वर्मा

 पंकज तिवारी  लोगों को देवी-देवताओं के सम्मोहक चित्रों से परिचित करवाने वाले कलाकार थे राजा रवि वर्मा। इनके द्वारा ही मुंबई में लीथोग्राफ प्रेस की स्थापना (1894) की गई, फलत: अधिक और सस्ते चित्रों का निर्माण होने से देश के अधिकतर घरों में इनके चित्रों की पहुंच हुई। राजा रवि वर्मा के चित्रों में लोगों को अपने भगवान नजर आये और उनकी पूजा भी हुई। अपने चित्रों के विषय और सजीवता के बल पर ही रवि वर्मा भारतीय जनमानस के दिलों पर राज करने लगे थे। कहना गलत न होगा कि रवि…

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