इस रंगमंच पर भी तुम अनूठे हो पापा!

ग्रूशा कपूर सिंह प्रसिद्ध रंगकर्मी रंजीत कपूर को हिन्दी रंगमंच का राजकपूर कहा जाता रहा है। उनके प्रशंसकों का दायरा कई पीढ़ियों तक फैला है। अगर ऐसा न होता तो उनसे उनके 1977 के नाटक ‘बेगम का तकिया’ को तीन दशकों से अधिक समय बाद पुनर्जीवित करने का अनुरोध आखिर क्यों होता है? रंगमंच का उनका अपना मुहावरा है लेकिन कम ही लोग जाते हैं कि उनका जीवन कितना संघर्षों भरा, उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरा है। ये संघर्ष उनके पेशे के भी रहे हैं और पारिवारिक भी। उन्हें आज…

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