समकालीन कला की अवधारणा

रेखा के. राणा किसी भी रचना में समय अनिवार्य तत्व है। रचना के विषय प्रथमतः समय के झरोखे से होकर आते हैं। वस्तुतः विषय तो हमारे चारों ओर उपस्थित हैं, उन्हें ग्रहण करने में रचनाकार की संवेदनशीलता विशेष रूप से माध्यम के रूप में काम करती है। कला के सभी रूप अपने परिवेश के साथ लगातार टकराव से उपजते हैं किन्तु भारतीय संदर्भ में शाश्वत और चिरंतन मूल्यों की अजस्र धारा संवेदना की अभिव्यक्तियों को इस प्रकार प्रभावित करती रही कि कला के यथार्थ रूप या तो सामने आए ही…

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