मुमताज़ अफसानानिगार असग़र वजाहत

अलीगढ ने मुझे बनाया है। इस संचयन का रस्मे इजरा अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में होना मेरे लिए बेहद ख़ास मौक़ा है। आज यहाँ मैं अनूठे शायर शहरयार, जावेद कमाल और कुंवरपाल सिंह को भी याद कर रहा हूँ। सुप्रसिध्द कथाकार-नाटककार असग़र वजाहत ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के केनेडी हॉल में आयोजित एक समारोह में कहा कि उर्दू के जो पाठक देवनागरी नहीं पढ़ पाते और हिंदी के वे पाठक जो उर्दू लिपि नहीं जानते -दोनों भारी नुकसान में हैं क्योंकि खड़ी बोली का साहित्य इन दोनों लिपियों में बिखरा हुआ है। वजाहत ने…

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इंसान है या भोपू

इन दिनों ललित कला अकादमी नई दिल्ली के कला वीथिका 5 में चित्रकार संजय शर्मा और छायाकार कुमार जिगीषु के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है | यह प्रदर्शनी 25 अप्रैल से 1 मई 2018 तक कला प्रेमियों के लिए लगी रहेंगी| समय समय पर कला के तमाम विधाओं पर नए नए प्रयोग निरंतर हुए है और आज भी किये जा रहे है, जिसके कारण कला के विभिन्न रूप हमारे सामने आते रहते है। जिन्हें सभी अपने अपने समाज , जीवन ,विचारधारा, सभ्यता और संस्कृति से प्रभावित हो कर ही…

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हिन्दू कॉलेज में ‘आषाढ़ का एक दिन’

पीयूष पुष्पम ———— दिल्ली के अग्रणी शिक्षण संस्थान हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था  ‘अभिरंग’ द्वारा रंग महोत्सव के अंतर्गत रंगसमूह ‘शून्य’ द्वारा ‘आषाढ़ का एक दिन‘ का मंचन हुआ।  मोहन राकेश द्वारा लिखे गए इस चर्चित नाटक की कथावस्तु संस्कृत कवि कालिदास के जीवन पर आधारित है। कालिदास और मल्लिका की दुखांत प्रेम कथा के साथ सत्ता और कलाकार के द्वंद्व  का भी इस नाटक में चित्रण किया गया है। नाटक का निर्देशन कर रही डॉ रमा यादव ने मल्लिका का भावप्रवण अभिनय भी किया। वहीं मल्लिका की माता अम्बिका की भूमिका में मनीषा स्वामी  ने अपने संवाद ‘तुम जिसे भावना कहती हो वह केवल छलना और…

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