भारत मेरा दूसरा घर

अमित कल्ला से इनसंग सांग

दक्षिण कोरिया के क्यूरेटर इनसंग सांग से मिलना हमेशा ही मन को एक अलग अहसास देता रहा है, दृश्य कलाओं के प्रति उनकी दीवानगी को विभिन्न कला उत्सवों में उनके जयपुर आने के दौरान अक्सर करीब से देखता रहा हूं | दो वर्ष पहले उनके साथ लम्बी यात्राओं के भी अवसर आए, तब कला की संजीदगी के अलावा जीवन के प्रति उनके विनम्र स्वभाव और मन की धीरता को देखकर मैं उनका कायल हो गया | सांग अपने आप में जिन्दगी से दो-दो हाथ करते रहने के इंसानी संघर्ष के उदाहरण भी हैं। एक गरीब किसान परिवार में जन्म लेने के बाद पढ़ लिख कर प्रारंभिक दौर में सरकारी नौकरी, इलेक्ट्रिक कम्पनी और कोरिया के अनिवार्य सैन्य अभ्यास को पीछे छोड़ कर उन्होंने कला के सहज सा निध्य को स्वीकारा, जो बचपन से उनकी अन्तरमन की तलाश का एक हिस्सा था | कविता और संगीत के लिए उनके गहरे लगाव ने दुनिया के कई खूबसूरत आलम उन्हें दिखलाए हैं। 32  मुल्कों में समय गुजारने के बाद भारतीय रवानियत और उसके जीवन तत्व के प्रति उनकी आस्था हर रोज चट्टान सी मज़बूत होती महसूस होती है, जिसके मूल में उनके भीतर एक आध्यात्मिक आलोकन का बिम्ब भी साफ दिखाई देता है |


इनसंग सांग ने सियोल से कला प्रबंधन में स्नातकोत्तर किया और फिर ओरियंटल आर्ट एंड फिलासफी में पीएचडी कर डाक्टर की उपाधि हासिल की | ऑस्ट्रेलिया की एबोरीजनल आर्ट के गहन अध्ययन के लिए काफी समय उन्होंने सिडनी और उसके आसपास गुजारा, जो इंडीजीनियस कलाओं के रूपकों को नजदीकी से जानने समझने का एक बड़ा अवसर था। उनके मुताबिक जिसके मार्फत दुनिया की तमाम कलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से अध्ययन करने की, उनके अन्दर एक संज्ञानात्मक समझ बनी और जिसमें भारतीय कलाओं को जानने का आकर्षण भी छिपा था, जिसकी दुनिया में अपनी ही एक विशेष जगह है | वे 22 सालों तक सियोल आर्टिस्ट सेंटर के क्यूरेटर रहे, जिसकी गिनती दुनिया के दस बड़े कला केन्द्रों के रूप में की जाती है। वहां रहते उन्होंने कई विश्वस्तरीय प्रदर्शनियों को क्यूरेट किया और पेरिस में आर्ट इंटर्नशिप का भी हिस्सा बने | कोरियन दूतावास के माध्यम से आर्ट एक्सचेंज प्रोग्राम को बढ़ावा देने के उदेश्य से सांग ने दिल्ली में ललित कला अकादमी से सम्पर्क साधा। उस दौरान बी. भास्करन अकादमी के अध्यक्ष हुआ करते थे और जयकृष्ण अग्रवाल ज्यूरी बोर्ड के सदस्य। उन दोनों ने इस कोरियन क्यूरेटर के प्रोजेक्ट को बड़ी शिद्दत से आगे बढ़ाया | जयकृष्ण अग्रवाल के प्रति सांग के दिल में सम्मान का भाव आज भी झलकता है |

आर्ट एक्सचेंज के इस सिलसिले ने भारतीय समकालीन कला के लिए दक्षिण कोरिया में एक नया आकाश रचा, कई युवा कलाकारों को फेलोशिप और आर्टिस्ट इन रेजीडेंसी प्रोग्राम का हिस्सा बनने का मौका मिला। एक लम्बे समय तक सांग के प्रयासों से कई भारतीय कला प्रदर्शनियां कोरिया के अलग अलग शहरों में आयोजित की गईं और भारत में भी बड़े स्तर पर कोरियन कलाकारों की कृतियों की नुमाइश की गई | इस समूचे दौर ने समकालीन भारतीय कला के नए प्रारूप को दुनिया के सामने रखा,  जिस के मद्देनजर ‘हाइब्रिड ट्रेंड्स 2006’ सियोल में भारतीय कला प्रदर्शनी को विशेष सम्मान से नवाजा गया, सांग के लिए जो आज भी नायाब पल है, जिसकी खुशी की चमक आज भी उनकी आंखों में देखी जा सकती है | पांच वर्ष तक इनसंग सांग दिल्ली में कोरियन कल्चरल सेंटर के डाइरेक्टर भी रहे, जहां कई तरह के कला आयोजनों को किया गया ,देश के अलग अलग प्रान्तों के युवा कलाकारों को स्थान मिला |


भारतीय कलाओं से सम्बन्ध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि दरअसल भारतीय कला का हर स्वरूप अपने आपमे एक सचेतन अनुभव है, जो स्वभावतः बहुआयामी और असीम वैविध्यता से सम्पन्न है | जहां एक व्यापक समय में बहुत कुछ घटित हो रहा है जिसमें कई धाराएं एक साथ बह रही हैं, जो बिना किसी टकराहट के एक दूसरे को समृद्ध करती हुई अपने विस्तार को पाती हैं। आज जिस अवस्था की दूसरे मुल्कों में कल्पना भी नहीं की जा सकती | आर्ट फॉर आर्ट सेक सरीके मुहावरों की वे यहां सार्थकता नहीं पाते क्योंकि भारतीय कलाओं के परिपेक्ष्य में अधिकतर तत्व अन्तर सम्बन्धित हैं। सब कुछ सबसे जुडा है, जहां जीवन के इर्दगिर्द रचना अपना भाव भरा आकर लेती है। वही लय सर्वोपरि है। लिहाजा धर्म, दर्शन, सामाजिकी सब कुछ सब तरफ अपनी गरिमा के साथ प्रतिबिंबित होता है |
सांग का मानना है कि हिन्दुस्तान के युवा कलाकारों को पश्चात्य देशों की तरफ ज्यादा उम्मीदों से देखने की जरूरत नहीं है। खुद उनके अपने देश में प्रेरणा के अनन्य स्रोत मौजूद हैं। जो अपने आपमें पूर्णता को लिए हैं जहां भीतर की अकूत संभावनाएं और सुन्दरता है, जिसके सहारे कितना कुछ पाया जा सकता है | पश्चिम अब संतृप्ति के कगार पर खड़ा है, जिसने अपनी आत्मा के उत्स को खो दिया, चारों और एक्सप्रेशन में एकान्तिकता भरी है जिसका स्वभाव बहुत कठिन है | भारत में लोक और आदिवासी कलाओं की सबसे गहन और दुनिया में सबसे विविधता भरी उपस्थिति है, जहां हर अंचल के अपने न केवल रंग, फॉर्म, आकृतियां हैं बल्कि असंख्य सुनहले रुपहले जीवंत कथानक हैं जिनमें यकीनन कुछ ऐसा है, जो पूरी दुनिया के अलग-अलग भागों में वास करते उस लोक को जोड़ता है | ह्यूमन डिजायर की समानता साफ-साफ नजर आती है, दरअसल कला की शुरुआत वहीं से होती है |


सांग मानव सौन्दर्य की बात करते हैं, जिसके अपने मायने हैं, जो विशुद्ध अनुभव का मसौदा है। जे. स्वामीनाथन को वे लोक और आदिवासी कला के सबसे बड़े जानकारों और जनगढ सिंह श्याम को उनकी कला जगत को सबसे बड़ी देन के रूप में देखते हैं | उनके अनुसार स्वामीनाथन की पेंटिंग्स को देखकर उनकी चेतना हमेशा आंदोलित होती है, मानों किसी स्थायी भाव से साक्षात्कार होना होता है, जिसका नेचुरल एक्सटेंशन अखिलेश के व्यक्तित्व और कृतित्व में देखा जा सकता है | मानव विज्ञान के आधार पर भारत में लोक और आदिवासी कलाओं की तकरीबन 40 से अधिक शैलियां हैं जिनका वे लगातार अध्ययन कर रहे हैं। सांग बताते हैं कि अब तक 70 प्रतिशत हिंदुस्तान घूम लिया है तीस प्रतिशत अभी बाकी है जो अनेक संभावनाओं से भरा है | उन्होंने दुनिया के 30 मुल्क में रहकर भारत को अपने दूसरे घर सा पाया है। इनसंग का सपना है कि वे अपने देश कोरिया में एक आदिवासी कला संग्रहालय बनाएं, जिसमें भारत की आदिवासी एवं लोक कला का संग्रह हो। जहां पूरी दुनिया  हिन्दुस्तान की इस अकूत संस्कृति से मुखातिब हो |

(नादरंग-4 से )

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3 Thoughts to “भारत मेरा दूसरा घर”

  1. avadhesh yadav

    बहुत बढ़िया अमित। इन्सेंग के व्यक्तित्व और उनके सरोकारों से बढ़िया परिचय मिला। शुभकामनाएं।

    1. rang raag

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Insung Song

    dear Mr. Amit Kala I read the your beautiful articles with Google Translator.
    Thank you very much for your writing.

    I love Indian people and India, so I’ve been to your country India often, but your compliments about me are undeserved.

    Corona virus keeps me in Korea, but my heart is still toward India.
    I am praying that your country, which had been in lockdown by Corona, will recover quickly.
    It will return to normal soon I believe.

    I look forward to seeing you again soon in Jaipur. Stay safe and take care

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