बनारस को देखने के लिए तीसरे नेत्र की जरूरत

शाम के लिए मशहूर शहर में, 
सुबह के प्रसिद्ध नगर की छटा
लखनऊ में साल की आखिरी कला प्रदर्शनी ‘काशी रंग’ सोमवार से अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी की कला दीर्घा में शुरू हुई। प्रदर्शनी के बहाने शाम के लिए मशहूर अपने नगर में सुबह के लिए प्रसिद्ध प्राचीन नगर वाराणसी के विविध रंग चित्रों के जरिए प्रदर्शित किए गए हैं। 30 दिसंबर तक चलने वाली यह कला प्रदर्शनी वाराणसी के चित्रकार एवं कला शिक्षक अजय उपासनी के छोटे-बड़े चित्र और रेखांकनों पर आधारित है। 
प्रदर्शनी के सोमवार को सायंकाल उद्घाटन के अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार तथा कला एवं शिल्प महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य जयकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि बनारस को देखने के लिए तीसरे नेत्र की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि बनारस को कई चित्रकारों ने चित्रित किया है जिनमें पहले पहल रामकुमार के काम की मुझे याद आती है। कला समीक्षक एवं नादरंग पत्रिका के संपादक आलोक पराड़कर ने कहा कि बनारस हमेशा से कलाकारों को लुभाता रहा है लेकिन बनारस को केवल उसके वास्तुशिल्प से नहीं समझा सकता है। बनारस में रस उन चीजों से आता है जिन्हें महसूस किया जा सकता है। ऐसे में उसे चित्रित करना आसान नहीं है। इस मौके पर मोहम्मद शकील, आजेश जायसवाल, पंकज गुप्त, प्रभाकर राय, रामबाबू, धीरज यादव सहित कई संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्यकला संकाय से मेरिट स्कालरशिप के साथ स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण करने वाले उपासनी की इस प्रदर्शनी में वाराणसी और मुख्य रूप से घाटों पर आधारित चित्र प्रदर्शित किए गए हैं ।
चित्रकार उपासनी ने इस मौके पर कहा कि वाराणसी को सिर्फ घाटों के वास्तुशिल्प के संदर्भ में न दर्शाकर मैंने इस नगर से जुड़े मोक्ष,आध्यात्मिकता,धार्मिक प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में प्रतिबिम्बित करने का प्रयास किया है जो मूर्त – अमूर्त रूपों में प्रदर्शित हुआ है।  प्रदर्शनी में अमूर्त चित्र भी प्रदर्शित हैं और कुछ छोटे आकार के चित्र भी हैं। इन चित्रों को कागज़ ,कैनवास में ऐक्रेलिक, तैल एवं जलरंग में बनाया गया है।
जवाहर नवोदय विद्यालय में कला शिक्षक उपासनी के चित्र कई एकल और समूह प्रदर्शनियों में प्रदर्शित होते रहे हैं।संगीत में गहरी रुचि रखने वाले उपासनी को नवोदय विद्यालय समिति द्वारा भी कई बार पुरस्कृत किया गया है। कला शिक्षण पर उन्होंने कई कार्यशालाओं का आयोजन भी किया है। प्रदर्शनी 25 से 30 दिसंबर तक पूर्वाह्न 11 बजे से सायं छह बजे तक अवलोकनार्थ खुली रहेगी।

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