……फिर छलकी मधुशाला

 पूनम किशोर की चित्रों की प्रदर्शनी जहाँगीर आर्ट गैलरी मुम्बई में शुरू
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-भूपेंद्र कुमार अस्थाना
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“चित्रकार बन साकी आता लेकर तूली का प्याला,
जिसमें भरकर पान कराता वह बहु रस-रंगी हाला,
मन के चित्र जिसे पी-पीकर रंग-बिरंगे हो जाते,
चित्रपटी पर नाच रही है एक मनोहर मधुशाला।।४२।”
-(मधुशाला / भाग ३ / हरिवंशराय बच्चन)
    कलाकार वही जो अपनी कल्पनाओं को अपनी कला के माध्यम से साकार रूप प्रदान करता है। प्रत्येक कल्पनाशील व्यक्ति कलाकार नही हुआ करता।
 कलाकार किसी चीज को बनाने के पहले उसे अपने मन मे देखता है और समझता है। फिर कागज़ पर रेखांकित करता और बार बार मिटाता और बनाता। कोशिश वही होती है जो उसके मानस पटल पर होता है।  इस क्रिया के दौरान कल्पना बार बार नया रूप , आकार धारण करती है।  वही मानस पटल पर बनी आकृति मानवीय सृष्टि होती है।कलाकार की अन्तः चेतना तथा शक्तिशाली संवेग कलाकृति को एक विशेष आकार देता चला जाता है। और जब कल्पना वाह्य रूप में  कला के माध्यम से कलाकृति के रूप में अभिव्यक्त हो जाती है तो वह यथार्थ हो जाती है।
   कुछ इन्ही विचारों को लेकर इलाहाबाद उत्तर प्रदेश की युवा महिला चित्रकार पूनम किशोर ने कवि हरिबंश राय बच्चन की कविताओं का संकलन ” मधुशाला” पर अपने तूलिका और रंगों के माध्यम से उनकी कविताओं को अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर साकार रूप प्रदान करने की कोशिश की है। चित्रकार ने बच्चन की कविताओं को चित्र रूप प्रदान करके उन्हें याद किया है। उनकी कविताओं को एक एक नई दृष्टि दी है। पूनम कहती हैं कि जहाँ से आपको रस की प्राप्ति होने लगे वहीं मधुशाला है। जैसे कविताओं को पढ़कर मन मे रस की उत्पत्ति होती है वैसे ही रस चित्रों को देखकर भी आती है। दरअसल यह सब एक ही है चाहे कोई भी माध्यम हो चित्र,कविता, संगीत,साहित्य ।

    इन्ही रस को दिनांक 10 सितंबर 2018 से मुंबई के जहाँगीर आर्ट गैलरी में पूनम किशोर की चित्रों की प्रदर्शनी शीर्षक” मधुशाला” में वहाँ के कलाकार ले रहे हैं। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन  विनोद बच्चन (फ़िल्म प्रोड्यूसर) ने किया । प्रदर्शनी में 75 चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी 16 सितंबर 2018 तक लगी रहेगी।

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