इस रंगमंच पर भी तुम अनूठे हो पापा!

ग्रूशा कपूर सिंह प्रसिद्ध रंगकर्मी रंजीत कपूर को हिन्दी रंगमंच का राजकपूर कहा जाता रहा है। उनके प्रशंसकों का दायरा कई पीढ़ियों तक फैला है। अगर ऐसा न होता तो उनसे उनके 1977 के नाटक ‘बेगम का तकिया’ को तीन दशकों से अधिक समय बाद पुनर्जीवित करने का अनुरोध आखिर क्यों होता है? रंगमंच का उनका अपना मुहावरा है लेकिन कम ही लोग जाते हैं कि उनका जीवन कितना संघर्षों भरा, उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरा है। ये संघर्ष उनके पेशे के भी रहे हैं और पारिवारिक भी। उन्हें आज…

Read More

समकालीन कला की अवधारणा

रेखा के. राणा किसी भी रचना में समय अनिवार्य तत्व है। रचना के विषय प्रथमतः समय के झरोखे से होकर आते हैं। वस्तुतः विषय तो हमारे चारों ओर उपस्थित हैं, उन्हें ग्रहण करने में रचनाकार की संवेदनशीलता विशेष रूप से माध्यम के रूप में काम करती है। कला के सभी रूप अपने परिवेश के साथ लगातार टकराव से उपजते हैं किन्तु भारतीय संदर्भ में शाश्वत और चिरंतन मूल्यों की अजस्र धारा संवेदना की अभिव्यक्तियों को इस प्रकार प्रभावित करती रही कि कला के यथार्थ रूप या तो सामने आए ही…

Read More

श्याम शर्मा-मगध में मथुरा के उत्सवी रंग

कुमार दिनेश लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की भूमि मथुरा (यूपी) के गोवर्धन कस्बा में जन्में छापा-कलाकार श्याम शर्मा ने 1966 में प्राचीन मगध की भूमि पाटलिपुत्र को अपनी कला साधना का केंद्र बनाया और आधी सदी से भी अधिक लंबी कला यात्रा के बाद आज 77 साल की उम्र में वे देश के शीर्षस्थ कलाकारों की पंक्ति में खड़े हैं। लखनऊ कला महाविद्यालय से डिप्लोमा करने के बाद वे पटना आए और यहां पटना कला महाविद्यालय में शिक्षक नियुक्त हुए। उन दिनों पूरे देश में शिक्षक बनने की न्यूनतम योग्यता डिप्लोमा…

Read More

स्मृतियों के कई रंग

जयकृष्ण अग्रवाल कभी कभी बड़े अहम लोग हाशिए पर चले जाते है। ऐसे ही थे लखनऊ कला महाविद्यालय के लीथो प्रोसेस फोटो मेकैनिल विभाग के प्रवक्ता हीरा सिंह बिष्ट। फोटोग्राफिक डार्करूम आदि की सुविधा भी इसी विभाग में उपलब्ध थी। फोटो फिल्म का जमाना था और कैमरे के बाद सारा काम तो डार्करूम में ही होता था। हीरा सिंह जी को सारे कैमिकल्स और उनके प्रयोग के बारे में विस्तृत जानकारी थी। किन्तु वह समय था जब फोटोग्राफी से अधिक लोगों की रुचि कैमरों तक ही सीमित थी। आमतौर से…

Read More

बनारस को देखने के लिए तीसरे नेत्र की जरूरत

शाम के लिए मशहूर शहर में,  सुबह के प्रसिद्ध नगर की छटा लखनऊ में साल की आखिरी कला प्रदर्शनी ‘काशी रंग’ सोमवार से अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी की कला दीर्घा में शुरू हुई। प्रदर्शनी के बहाने शाम के लिए मशहूर अपने नगर में सुबह के लिए प्रसिद्ध प्राचीन नगर वाराणसी के विविध रंग चित्रों के जरिए प्रदर्शित किए गए हैं। 30 दिसंबर तक चलने वाली यह कला प्रदर्शनी वाराणसी के चित्रकार एवं कला शिक्षक अजय उपासनी के छोटे-बड़े चित्र और रेखांकनों पर आधारित है।  प्रदर्शनी के सोमवार को सायंकाल उद्घाटन…

Read More

छबीला रंगबाज का शहर

‘छबीला रंगबाज का शहर‘ केवल आरा या बिहार की कहानी नहीं है अपितु इसमें हमारे समय की जीती जागती तस्वीरें हैं  जिनमें हम यथार्थ को नजदीक से पहचान सकते हैं। राज्यसभा सांसद और समाजविज्ञानी मनोज झा ने हिन्दू कालेज में छबीला रंगबाज का शहर के मंचन में कहा कि पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिन्दू कालेज की गतिविधियां प्रेरणास्पद रही हैं। झा यहाँ हिंदी नाट्य संस्था अभिरंग के सहयोग से ‘आहंग’ द्वारा मंचित नाटक में बोल रहे थे। युवा लेखक प्रवीण कुमार द्वारा लिखित इस कहानी को रंगकर्मी…

Read More

कैनवास पर भी चौंकाता है असगर वजाहत का रचना संसार

दिल्ली में लगी चित्र प्रदर्शनी ये चित्र एक लेखक के बनाए हैं ऐसा नहीं लगता क्योंकि इनमे निहित विशेष ताज़गी बताती हैं कि इन्हें किसी सिद्धहस्त चित्रकार ने बनाया है। विख्यात कला समीक्षक और लेखक प्रयाग शुक्ल ने उक्त विचार सुप्रसिद्ध कथाकार – नाटककार असग़र वजाहत के चित्रों की प्रदर्शनी में व्यक्त किए। शुक्ल ने कहा कि असग़र विनम्रता से कहते हैं कि मैं चित्रकार नहीं लेखक हूँ लेकिन उन्होंने रंगों के प्रयोग और प्रस्तुतिकरण की विविधता से चौंका दिया है। ऑल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसायटी की कला…

Read More

उपेक्षा का शिकार एक महान कलाकार की कलाकृति

 कला संस्कृति, संरक्षण,स्वच्छता के नाम पर लगातार बजट पास होते जा रहे है। लेकिन उसका असर उसका परिणाम हम सभी को ज्ञात है। तमाम कला कृतियाँ उपेक्षा का शिकार हुए जा रही हैं। रवींद्रालय चारबाग लखनऊ उत्तर प्रदेश के भवन पर बने इस महान कलाकार की कृति को देखिए।किस प्रकार स्थिति है। घास फूस उग रहे हैं। काई जैसी चीजें पनप रही हैं। इस स्थिति को देखकर यही लगता है कि कुछ दिनों में हम इस कृति को खो देंगे यदि जल्दी ही ध्यान नही दिया गया तो। यह बहुत…

Read More

……फिर छलकी मधुशाला

 पूनम किशोर की चित्रों की प्रदर्शनी जहाँगीर आर्ट गैलरी मुम्बई में शुरू —- -भूपेंद्र कुमार अस्थाना —- “चित्रकार बन साकी आता लेकर तूली का प्याला, जिसमें भरकर पान कराता वह बहु रस-रंगी हाला, मन के चित्र जिसे पी-पीकर रंग-बिरंगे हो जाते, चित्रपटी पर नाच रही है एक मनोहर मधुशाला।।४२।” -(मधुशाला / भाग ३ / हरिवंशराय बच्चन)     कलाकार वही जो अपनी कल्पनाओं को अपनी कला के माध्यम से साकार रूप प्रदान करता है। प्रत्येक कल्पनाशील व्यक्ति कलाकार नही हुआ करता।  कलाकार किसी चीज को बनाने के पहले उसे अपने…

Read More

सिरेमिक त्रिनाले में यूपी

उत्तर प्रदेश के दो सिरेमिक कलाकार सितांशु जी मौर्य लखनऊ तथा त्रिवेनी तिवारी भदोही की कलाकृति कंटेम्पररी क्ले फाउंडेशन द्वारा आयोजित दिनांक 31 जुलाई से 18 नवंबर 2018 तक   चलने वाले जवाहर कला केंद्र जयपुर में “इंडिया सिरेमिक त्रिनाले– ब्रेकिंग ग्राउंड ” में प्रदर्शित किया गया है। वर्तमान में शितांशु ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र कोलकाता में सिरामिक सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं। और लगातार सेरेमिक विधा में कार्य भी कर रहे हैं। तथा त्रिवेनी सेरेमिक विधा में दिल्ली में स्वतंत्र कलाकार के रूप में कार्य कर रहे…

Read More