चाय-वाई एंड रंगमंच – 2020

विश्वव्यापी लॉकडाउन के दौरान कोकोनट थिएटर ने एक महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण परियोजना – “चाय-वाई एंड रंगमंच – 2020” प्रस्तुत की है ।इसके तहत भारत और अन्य देशों के रंगमंच विशेषज्ञों के साथ ऑनलाइन  सेशन आधिकारिक कोकोनट थिएटर फेसबुक पेज पर हर रोज़  शाम 6  बजे पर आयोजित हो रहा है जिसमें दिग्गज अभिनेता, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नाटककार और निर्देशक, मेकअप  विशेषज्ञ, संगीतकार,  डिजाइनर, कोरियोग्राफर और तकनीशियन अपने अनुभवों को  साझा करते हैं, साथ ही उनके व्यक्तिगत जीवन की प्रेरणा जो किसी भी  इच्छुक थिएटर छात्र, शौकिया रंगमंच कलाकार,लेखक,निर्देशक,संगीतकार, कोरियोग्राफर, मेकअप कलाकार, डिजाइनर, तकनीशियन और  थिएटर समूह और पूरे थिएटर बिरादरी के लिए उपयोगी हो सकते हैं । खास बात यह भी है कि ये सत्र सभी के लिए उपलब्ध है और पंजीकरण की  आवश्यकता नहीं है।कोविड -19 और वर्ल्डवाइड लॉकडाउन के कारण, साल 2020 पूरी दुनिया के लिए विशेष रूप से थियेटर उद्योग के लिए काफी नुकसानदायक वर्ष रहा है, जो कि लाइव एक्ट में विश्वास रखता है। “चाय-वाई  एंड  रंगमंच – 2020”  ने ऑनलाइन  सेशन्स के माध्यम से थिएटर के दर्शकों का मनोरंजन भी किया है। इस कारण ऑनलाइन  और  ऑफलाइन  दर्शकों में वृद्धि हुई है।अलग-अलग समय क्षेत्रों के बावजूद दर्शक इन  सेशन्स को देखना पसंद करते हैं, उदाहरण के लिए, कैलिफ़ोर्निया, यूएसए के एक सज्जन इन लाइव सेशन्स को देखने के लिए रोजाना सुबह  पांच  बजे उठते हैं। संस्था के अनुसार, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहुंच  और लोकप्रियता के कारण  कई  रंगमंच  विशेषज्ञ  कोकोनट  थिएटर से सीधे संपर्क कर “चाई-वाई और रंगमंच – 2020”  पर अपने सेशन्स की मेजबानी करने  का अनुरोध  कर रहे हैं।इन सेशन्स से जुड़ने  वाले सभी वक्ता विभिन्न संस्कृति,  विभिन्न समूहों और कइयों के लिए तो ये ऑनलाइन  प्रक्रिया  बिल्कुल  ही  नई चीज़ थी, उसके बावजूद भी वे इससे जुड़ने  के लिए  स्वेच्छा से तैयार हुए। इनमें से कुछ ने…

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संगीत में नई चुनौतियों का दौर

वाराणसी में हुआ वेबीनार कोरोना काल संगीत जगत के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आया है। इस दौर में जहां संगीत के माध्यम से जीविकोपार्जन करने वाले कलाकारों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है वहीं संगीत शिक्षा के लिए भी नई परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं। संगीत शिक्षा का ऑनलाइन माध्यम को तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर ही लिया जाना चाहिए। वाराणसी के कमच्छा स्थित वसन्त कन्या पी.जी. कालेज, कमच्छा, वाराणसी के वाद्य संगीत (सितार) विभाग द्वारा 26 जून से द्विदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया जिसका…

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किस कोने लगेंगे अब ये कोने!

आलोक पराड़कर (अमर उजाला, 28 जून 2020)… पप्पू की दुकान इन्हीं कलाकारों, चित्रकारों, पत्रकारों, नेताओं और नागरिकों की दैनिक (अर्थात् दिन की) छावनी है !…हाल यह है कि दो लम्बी मेजों और चार लम्बे बेंचोंवाले इस दड़बे में दस-बारह गाहकों के बजाय बीस-पच्चीस संस्कृतिकर्मी सुबह से शाम तक ठंसे रहते हैं! उधर गोलियों के डब्बे के साथ बलदेव, इधर चूल्हे और केतली के पास पप्पू-नाम पप्पू उम्र चालीस साल!…अक्तूबर के दिन। सुबह के नौ बज रहे थे। दुकान ग्राहकों से भरी थी। कुछ लोग खाली होने के इन्तजार में गिलास लिए खड़े थे। शोर-शराबा काफी…

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मेरे सांगीतिक जीवन के आधार स्तम्भ मेरे पिता

कमला शंकर(प्रसिद्ध गिटार वादिका) सिर से पिता की छांव चली गई। 85 वर्ष की अवस्था में पिताजी 12 जून को अंतिम यात्रा को प्रस्थान कर गए। वे मेरे सांगीतिक जीवन के आधार स्तम्भ,मेरी हर सोच हर कार्य मे अविचल चट्टान की भांति खड़े रहते थे। आज मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के आशीर्वाद फलस्वरूप हूं।  पिता जी और माता जी  की पारिवारिक पृष्ठभूमि में संगीत से जुड़ाव रहा है और इसी के चलते पिता जी हारमोनियम,,बांसुरी के साथ साथ नाक से शहनाई भी बजाते थे और अपने लोगों के…

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सराही गई आनलाइन कला प्रदर्शनी

एक्सपोजिशन वर्चुअल को चार हजार कलाप्रेमियों ने देखा कोरोना संकट में सामूहिक सहभागिता के नए विकल्प तलाश रहे कलाजगत को पिछले दिनों आयोजित एक्सपोजिशन वर्चुअल आनलाइन कला प्रदर्शनी के जरिए काफी सराहना मिली है। अवध आर्ट फेस्टिवल ने इसका आयोजन खानम आर्ट्स, बंगाल आर्ट फाउंडेशन, जयपुर आर्ट समिट, लायंस क्लब, अवध जिमखाना क्लब के सहयोग और समन्वय से किया था जिसमें 50 कलाकारों और छायाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई। एक जून से दस दिनों तक चली इस प्रदर्शनी को चार हजार से अधिक कलाप्रेमियों ने देखा और सराहा। निर्णायक…

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कला की कसौटियों पर राजा रवि वर्मा

 पंकज तिवारी  लोगों को देवी-देवताओं के सम्मोहक चित्रों से परिचित करवाने वाले कलाकार थे राजा रवि वर्मा। इनके द्वारा ही मुंबई के लोनावाला में लीथोग्राफ प्रेस की स्थापना (1894) की गई, फलत: अधिक और सस्ते चित्रों का निर्माण होने से देश के अधिकतर घरों में इनके चित्रों की पहुंच हुई। राजा रवि वर्मा के चित्रों में लोगों को अपने भगवान नजर आये और उनकी पूजा भी हुई। अपने चित्रों के विषय और सजीवता के बल पर ही रवि वर्मा भारतीय जनमानस के दिलों पर राज करने लगे थे। कहना गलत न होगा…

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योगेश-कैसी है पहेली

आलोक पराड़कर (राष्ट्रीय सहारा,31 मई 2020)‘मैं अपने बारे में शैलेंद्र की लाइन कह सकता हूं-सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी, सच है दुनियावालों कि हम हैं अनाड़ी..।’ प्रसिद्ध गीतकार योगेश ने एक साक्षात्कार (इंडिया टुडे, साहित्य वार्षिकी 2017-18 ) में तीन वर्ष पूर्व यह बात कही थी। मुंबई के अपने फ्लैट में गुमनामी की जिन्दगी जी रहे योगेश किस होशियारी के ना होने की बात कह रहे थे? एक गीतकार की होशियारी तो उनमें खूब थी। अगर ना होती तो उनके ऐसे बेमिसाल गीत हमारे बीच कैसे होते,  तीन पीढ़ियों…

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कला देखने के दरमियान

अमित कल्ला सारे द्वार /खोलकर /बाहर निकल /आया हूं /यह /मेरे भीतर /प्रवेश का /पहला कदम है –जैन मुनिश्री क्षमासागर की यह सरल-सी कविता मुझे भी अपने भीतर प्रवेश करने का अनुनय करती दीखती है और मैं अपने मन के बहुतेरे द्वार खोलकर किन्हीं चित्रों को देखने कि कोशिश करता हूं, जहां बहुत सारी मूर्त-अमूर्त आकृतियां नई रोशनी लिए भीतर उतरने को उभर आयी हैं।गाहे-बगाहे हमारे द्वारा कुछ भी देखा जाना मौटे तौर पर किसी सहज वृति का ही नाम है, दरअसल जो एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे चाहे-अनचाहे हमें गुज़ारना…

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कहे में जो है अनकहा

नादरंग-4 (संपादकीय) शब्दों की अपनी सीमाएं हैं। कई अनुभूतियां ऐसी होती हैं जिन्हें व्यक्त करते हुए लगता है कि शब्द कम पड़ रहे हैं या उनके अर्थों में इतनी सामर्थ्य नहीं है जो सटीक वर्णन कर सकें। एक अधूरेपन का बोध होता है, लगता है जैसे ये अनुभूतियां शब्दों के कोश की पकड़ से परे हैं। मराठी कवि मंगेश पाडगांवकर ने ‘शब्दावाचुन कड़ले सारे शब्दांच्या पलिकडले..’ में शब्दों से परे की बात क्या इसीलिए की थी या हिन्दी के प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी बेटी की हंसी का वर्णन…

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इरफान को कई बार देखना..

आलोक पराड़कर (राष्ट्रीय सहारा,  30 अप्रैल 2020) फिल्म अभिनेता इरफान खान की अभिनय यात्रा पर गौर करें तो हम उनकी इमेज को किस दायरे में रख पाएंगे- नशीली आंखों वाला नायक या आंखों से खौफ पैदा कर देने वाला खलनायक, बीहड़ का बागी जो हमारे ग्रामीण परिवेश के करीब है या एक पढ़ा-लिखा बौद्धिक शहरी, अपनी उधेड़बुन में खोए रहने वाला कोई स्वप्नजीवी या कई रातों तक सो न पाने वाला मनोरोगी, अंग्रेजी सही ढंग से न बोल पाने वाला हमारे मध्यमवर्गीय समाज का कोई प्रतिनिधि या हालीवुड में अपनी…

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